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ऐसे करें छोटे और नवजात बच्चों की देखभाल

ऐसे करें छोटे और नवजात बच्चों की देखभाल

मां से बेहतर अपने शिशु को शायद ही कोई समझ सकता है | छोटे शिशु अपनी हर ज़रूरत के लिये मां पर पूरी तरह से निर्भर करते हैं – इसलिये नयी मां को उनकी आदतों और सुस्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बातों को जान लेना ज़रूरी है  जैसेकि: 

हमेशा शिशु को स्तनपान ही करवाये 

जन्म की पहली छमाही में बच्चे को केवल मां का ही दूध पिलाना ज़रूरी है | स्तनपान करवाने से आपकी फिगर खराब नहीं होती है |

शिशु के रोने पर झल्लायें या घबरायें नहीं 

छोटा शिशु शुरू  में केवल रो कर ही आपका ध्यान आकर्षित कर सकता है | मुख्यत: उसके रोने के अनेक कारणों में से कुछ – भूख लगना, नैपी गीला होना, किसी के उठाने का तरीका पसंद न होना,नींद से चिडचिडापन , आदि हो सकते  हैं। यदि वह बेहद कोशिशों के बावजूद भी चुप न हो – डॉक्टर से संपर्क करें| 

छोटे शिशु की मालिश ज़रूर करवाएं 

 हल्के हाथ से मालिश शिशु की  हड्डियों, मांसपेशियों आदि के संतुलित विकास के लिये बहुत ज़रूरी है | आप बाज़ार में उपलब्ध बेबी-ऑयल, जैतून या  बादाम का तेल इस्तेमाल कर सकती हैं| 

दादी- नानी या दायी की मदद से बच्चे को नहलायें

जन्‍म के लगभग दस दिन पूर्व आप  शिशु को मालिश के बाद हल्‍के गरम पानी से नहला सकती  हैं। बेहतर है कि आप परिवार की किसी बड़ी और अनुभवी महिला की मदद लें |

शिशु को बहुत ही ध्यान से गोद में उठायें | मज़ाक में भी उछालने की कोशिश न करें 

शिशु को  बहुत ही ध्यानपूर्वक उठायें | उसे गोद में उठाते वक़्त  उसके सिर के नीचे हाथ रख कर थोडा सहारा दें। मज़ाक में भी नवजात शिशु को झटक कर जगायें  नहीं या हवा में न उछालें|

शिशुओं को कैसे सहला कर सुलायें?

शुरू के तीन से चार महीनों तक छोटा शिशु दिन और रात में कोई अंतर नहीं कर पाता| पेट भरा होने पर वह आराम से सोना पसंद करेगा और जैसे ही उसे भूख सतायेगी वह नींद से जाग कर , रोने लगेगा | आप यह सुनिश्चित करें कि आप उसे दिन और रात में सही अन्तराल और अनुपात में स्तनपान करवायें| कभी भी अपने सोते शिशु, या पेट भरा होने पर उसे स्तनपान न करवायें|

शिशु को शाल, कम्बल तौलिये से लपेट कर ही रखें 

शिशु को लपेट कर रखने के पीछे उसके शरीर के तापमान को सामान्य रखने का कारण है| ध्यान दें कि आप शिशु को बेहतर तरीके से इस तरह लपेटें कि उसे सांस लेने में दिक्कत न हो और उसके शरीर का सामान्य तापमान प्रभावित न हो | 

समय पर बच्चे का टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण है

यदि आपने अस्पताल में डिलीवर किया है तो शिशु के जन्म के तुरंत बाद आपको टीकाकरण के बारे में आवश्यक जानकारी दी जायेगी| यदि आपका प्रसव अस्पताल में नहीं हुआ तो भी निकट के स्वास्थ्य केंद्र में जा कर बच्चे को टीकाकरण के लिये रजिस्टर करवा देना चाहिये | मां से बेहतर अपने शिशु को शायद ही कोई समझ सकता है | छोटे शिशु अपनी हर ज़रूरत के लिये मां पर पूरी तरह से निर्भर करते हैं – इसलिये नयी मां को उनकी आदतों और सुस्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बातों को जान लेना ज़रूरी है  जैसेकि: 

हमेशा शिशु को स्तनपान ही करवाये 

जन्म की पहली छमाही में बच्चे को केवल मां का ही दूध पिलाना ज़रूरी है | स्तनपान करवाने से आपकी फिगर खराब नहीं होती है |

शिशु के रोने पर झल्लायें या घबरायें नहीं 

छोटा शिशु शुरू  में केवल रो कर ही आपका ध्यान आकर्षित कर सकता है | मुख्यत: उसके रोने के अनेक कारणों में से कुछ – भूख लगना, नैपी गीला होना, किसी के उठाने का तरीका पसंद न होना,नींद से चिडचिडापन , आदि हो सकते  हैं। यदि वह बेहद कोशिशों के बावजूद भी चुप न हो – डॉक्टर से संपर्क करें| 

छोटे शिशु की मालिश ज़रूर करवाएं 

 हल्के हाथ से मालिश शिशु की  हड्डियों, मांसपेशियों आदि के संतुलित विकास के लिये बहुत ज़रूरी है | आप बाज़ार में उपलब्ध बेबी-ऑयल, जैतून या  बादाम का तेल इस्तेमाल कर सकती हैं| 

दादी- नानी या दायी की मदद से बच्चे को नहलायें

जन्‍म के लगभग दस दिन पूर्व आप  शिशु को मालिश के बाद हल्‍के गरम पानी से नहला सकती  हैं। बेहतर है कि आप परिवार की किसी बड़ी और अनुभवी महिला की मदद लें |

शिशु को बहुत ही ध्यान से गोद में उठायें | मज़ाक में भी उछालने की कोशिश न करें 

शिशु को  बहुत ही ध्यानपूर्वक उठायें | उसे गोद में उठाते वक़्त  उसके सिर के नीचे हाथ रख कर थोडा सहारा दें। मज़ाक में भी नवजात शिशु को झटक कर जगायें  नहीं या हवा में न उछालें|

शिशुओं को कैसे सहला कर सुलायें?

शुरू के तीन से चार महीनों तक छोटा शिशु दिन और रात में कोई अंतर नहीं कर पाता| पेट भरा होने पर वह आराम से सोना पसंद करेगा और जैसे ही उसे भूख सतायेगी वह नींद से जाग कर , रोने लगेगा | आप यह सुनिश्चित करें कि आप उसे दिन और रात में सही अन्तराल और अनुपात में स्तनपान करवायें| कभी भी अपने सोते शिशु, या पेट भरा होने पर उसे स्तनपान न करवायें|

शिशु को शाल, कम्बल तौलिये से लपेट कर ही रखें 

शिशु को लपेट कर रखने के पीछे उसके शरीर के तापमान को सामान्य रखने का कारण है| ध्यान दें कि आप शिशु को बेहतर तरीके से इस तरह लपेटें कि उसे सांस लेने में दिक्कत न हो और उसके शरीर का सामान्य तापमान प्रभावित न हो | 

समय पर बच्चे का टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण है

यदि आपने अस्पताल में डिलीवर किया है तो शिशु के जन्म के तुरंत बाद आपको टीकाकरण के बारे में आवश्यक जानकारी दी जायेगी| यदि आपका प्रसव अस्पताल में नहीं हुआ तो भी निकट के स्वास्थ्य केंद्र में जा कर बच्चे को टीकाकरण के लिये रजिस्टर करवा देना चाहिये | 

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