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पोलियो के लक्षण, रोकथाम और उपचार

पोलियो के लक्षण , रोकथाम और उपचार

पोलियो एक  खतरनाक बीमारी है, जिसके कुछ लक्षणों  व बचाव के तरीकों को जानना आवश्यक है | इस बीमारी को  ‘पोलियोमेलाइटिस’ के नाम से भी जाना जाता है तथा यह ये वायरस संक्रमित रोग है- जोकि पोलियो वायरस के शरीर में लघु जीवित रहने तक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। साथ ही ये रोगी के  मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है (लकवा या शारीरिक अंगों की विकृति) | डब्लूएचओ ने 2014 में भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया था पर कभी कभार पोलियो के केस सुनने में मिल जाते हैं | 

यह ज़रूरी है कि हम सब पोलियो के कुछ लक्षण जानें| 

पोलियो वायरस दो प्रकार से शरीर को नुक्सान पहुँचाता है- नॉन पेरालायीटिक तथा पेरालायीटिक पोलियो  रोगी को पहुंचे नुक्सान पर निर्भर करते हैं| कुछ लोग नॉन पेरालायीटिक पोलियो से प्रभावित होते हैं  जिसके लक्षण सामान्यत: किसी फ्लू जैसे हो होते हैं और औसत एक से दस दिन तक के लिए ही महसूस किये जाते हैं। वे कुछ इस प्रकार है : 

  • हल्का या तेज़ बुखार
  • गले में हल्की या तेज़ खराश
  • पैरों या बाहों में ऐंठन या दर्द 
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी महसूस होना 
  • उल्टी- दस्त 
  • सिर में दर्द
  • मेनिनजाइटिस
  • थकान तथा सुस्ती
  • गर्दन और पीठ में ऐंठन या दर्द

पेरालायीटिक पोलियो के मुख्य लक्षण वायरस के निष्क्रिय होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर ही दिखाई देने लगते हैं,  जिनमें निम्न प्रभाव शामिल हैं: 

  • ढीले  और पिलपिले अंग पड़ना – दायें बायें या दोनों ओर के
  • मांसपेशियों में तेज़ दर्द 
  • अचानक शरीर के किसी अंग में लकवा मारना
  • कूल्हे, टखनों और पैर में दर्द होना 

पोलियो दूषित पानी-भोजन या वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के साथ संपर्क में आने पर फैलता है। 

कमजोर इम्युनिटी वाले लोग – मुख्यत: छोटे बच्चे, आदि इसके सर्वाधिक शिकार होते हैं | उन्हें पोलियो की खुराक पिलाना ज़रूरी है| यदि कोई पोलियो ग्रस्त है, सबसे प्रभावी मानदंडों में प्रमुख सहायक उपचार कुछ इस प्रकार हैं: 

  • रोगी को उचित आराम, दर्द-निवारक दवायें उपलब्ध करवाना
  • मांसपेशियों की फिजियोथेरेपी तथा स्ट्रेंग्थनिंग 
  • उचित डॉक्टरों द्वारा स्वास्थय देख रेख – ( ओर्थो, आदि )
  • चलने में मदद करने के लिए उचित  सहायक यन्त्र
  • मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन के लिये मालिश या सिकाई
  • पुनर्वास तथा मानसिक सबल प्रदान करना

पोलियो एक  खतरनाक बीमारी है, जिसके कुछ लक्षणों  व बचाव के तरीकों को जानना आवश्यक है | इस बीमारी को  ‘पोलियोमेलाइटिस’ के नाम से भी जाना जाता है तथा यह ये वायरस संक्रमित रोग है- जोकि पोलियो वायरस के शरीर में लघु जीवित रहने तक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। साथ ही ये रोगी के  मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है (लकवा या शारीरिक अंगों की विकृति) | डब्लूएचओ ने 2014 में भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया था पर कभी कभार पोलियो के केस सुनने में मिल जाते हैं | 

यह ज़रूरी है कि हम सब पोलियो के कुछ लक्षण जानें| 

पोलियो वायरस दो प्रकार से शरीर को नुक्सान पहुँचाता है- नॉन पेरालायीटिक तथा पेरालायीटिक पोलियो  रोगी को पहुंचे नुक्सान पर निर्भर करते हैं| कुछ लोग नॉन पेरालायीटिक पोलियो से प्रभावित होते हैं  जिसके लक्षण सामान्यत: किसी फ्लू जैसे हो होते हैं और औसत एक से दस दिन तक के लिए ही महसूस किये जाते हैं। वे कुछ इस प्रकार है : 

  • हल्का या तेज़ बुखार
  • गले में हल्की या तेज़ खराश
  • पैरों या बाहों में ऐंठन या दर्द 
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी महसूस होना 
  • उल्टी- दस्त 
  • सिर में दर्द
  • मेनिनजाइटिस
  • थकान तथा सुस्ती
  • गर्दन और पीठ में ऐंठन या दर्द

पेरालायीटिक पोलियो के मुख्य लक्षण वायरस के निष्क्रिय होने के लगभग एक सप्ताह के भीतर ही दिखाई देने लगते हैं,  जिनमें निम्न प्रभाव शामिल हैं: 

  • ढीले  और पिलपिले अंग पड़ना – दायें बायें या दोनों ओर के
  • मांसपेशियों में तेज़ दर्द 
  • अचानक शरीर के किसी अंग में लकवा मारना
  • कूल्हे, टखनों और पैर में दर्द होना 

पोलियो दूषित पानी-भोजन या वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के साथ संपर्क में आने पर फैलता है। 

कमजोर इम्युनिटी वाले लोग – मुख्यत: छोटे बच्चे, आदि इसके सर्वाधिक शिकार होते हैं | उन्हें पोलियो की खुराक पिलाना ज़रूरी है| यदि कोई पोलियो ग्रस्त है, सबसे प्रभावी मानदंडों में प्रमुख सहायक उपचार कुछ इस प्रकार हैं: 

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