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दुर्घटना-स्थल पर हताहत रोगी की ऐसे करें सहायता

यदि कभी आपके सामने कोई सड़क दुर्घटना हो तो आप एक ज़िम्मेदार नागरिक की तरह  दुर्घटनाग्रस्त‍ व्‍यक्ति की मदद करें | कम से कम प्राथमिक चिकित्‍सा तथा पुलिस को सूचना देने में तो पहल करें ही| 

दुर्घटना ग्रस्त रोगी की मदद करें

भारत में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों के आंकड़ें प्रथम स्‍थान पर है जिसका मुख्य कारण रोगी को समय पर प्राथमिक चिकित्सा न मिल पाना है| आस-पास के लोग रोगी की मदद करने से डरते हैं या समय की कमी को जिम्मेवार ठहराते हुये निकल लेते हैं| 

हमें ऐसा गैर जिम्मेदार  व्यवहार नहीं करना चाहिये| प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाना या पुलिस को सूचित करना दोनों ही किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण हैं| इसके अलावा भी आप कुछ और मदद कर सकते हैं, जैसेकि : 

रोगी को आई चोटों की जांच करें – प्राथमिक चिकित्सा दें

दुर्घटनाग्रस्त रोगी की चोटों की जांच कर जानें कि चोट कहां आई है। दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी की स्थिति में अगर और लोग भी हों तो उन्हें गाड़ी से सावधानीपूर्ण बाहर निकालें। बहते खून की स्थिति में – प्राथमिक उपचार के कदम उठाये | दर्द से तड़पते बुजुर्गों की स्थिति में, उन्हें जल उपलब्ध करवाएं,  रोते बच्चों को आशा बंधाएं| 

अतिरिक्त ट्रैफिक को दुर्घटना- स्थल की  ओर आने से रोके 

जी हाँ, दुर्घटना स्थल पर ट्रैफिक को संभाल लेना भी एक महत्वपूर्ण मदद है| हो सकता है पुलिस को सूचित कर दिया गया  हो , रोगी को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाई जा रही हो – एम्बुलेंस भी किसी मिनट आती हो | ऐसे में दुर्घटना-स्थल पर ट्रैफिक का जमाव न होने दें | 

वाहन की आपातकालीन बत्तियां जला दें, दुर्घटना-स्थल से ट्रैफिक को परे नियंत्रण में रखने में सहायता करें ताकि अन्य चालक वहां फंसे नहीं और जाम की स्थिति उत्पन्न न हो जाये|  

पुलिस को सूचित करें

डरिये नहीं !

यदि कुछ भी न बन पड़ें, 100 नंबर पर स्थानीय पुलिस को दुर्घटना की सूचना प्रदान करें | सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार यह मानवीय कदम है और आप किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करेंगे | घटना-स्थल पर मौजूद रह कर आप अधिकारी को अपना बयान भी दर्ज करवा सकते हैं| 

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