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आज जाने की जिद्द न करो!

जीवन से क्यों लुप्त होता जा रहा है – रोमांस !

पश्चिमी संस्कृति में जहाँ सेक्स एक अभिव्यक्ति है, वहीँ हमारी हिन्दुस्तानी सभ्यता में  यह एक पारिवारिक संस्था है | हम इस बारे में बात नहीं करना चाहते, इस दिशा में कोई प्रयास नहीं करना चाहते पर इसकी आकांक्षा हमारे जीवन की एक अनकही अभिलाषा बनी रहती है | 

छोटे परिवार, कॉर्पोरेट कल्चर- शहरीकरण , आधुनिक शिक्षा, जॉब स्ट्रेस – ब्रेक अप्स, तलाक इत्यादि – एक तरफ तो हमें सामाजिक आज़ादी दे रहे हैं,  वहीँ दूसरी ओर हमारे मानसिक-स्थायित्व के लिये एक चुन्नौति भी बन रहे हैं | अपनी दोहरी सोच के चलते हम परस्पर एक अर्थहीन, विषम और कठिन – फस्ट्रेटिंग फेज की ओर बढ़ रहे हैं | 

ज़िंदगी से रोमांस को बिल्कुल ही समाप्त न हो जानें दे – हो सके तो इसे रोक लें !

महत्वकांक्षाओं को लगाम दे- इक्कठे समय व्यतीत करें

मनुष्य-जीवन श्रम, भागम-दौड़, संघर्ष के चलते हुये भी स्थिरता और पहचान की खोज में रहता है| हम सभी को  प्रेरणा की चाह रहती है- एक छोटा सा कॉम्प्लीमेंट भी मैजिकल हो सकता है | छोटी- छोटी चीजें भी कई बार रिश्तों  में शांति और सामंजस्य बनाए रखती हैं| एक दूसरे की पसंद -नापसंद को जानना, भावनाओं का सम्मान करना व्यस्तताओं के चलते भी ज़रूरी है| चूँकि अंत में कितनी ही सफलताओं और उपलब्धियों के चलते भी  उन्हें बांटने के लिये- एक साथी की ज़रुरत रहेगी जो हमारा कोई बेहद अपना होगा – अत: महत्वकांक्षाओं को वरीयता तो दें पर परिवार और पत्नी को भी नज़र-अंदाज़  न करें| 

संपर्क और निकटता की अभिव्यक्ति, किंतु – परन्तु 

दो व्यक्तियों का सामंजस्य मात्र प्रेम और सान्निध्य तक ही सीमित न होकर कई और परिपक्व वस्तुओं का गणित भी है, जैसेकि : 

  • साँझे निर्णय लेना, सोच विचार- सुलह सलाह के साथ गृहस्थी की ज़िम्मेवारियों को निभाना 
  • घर के ख़र्चों को अपनी योग्यताओं के बल पर साझी श्रम-क्षमता के बल पर अपने निर्धारित बजट के अनुसार चलाना 
  • अपनी चिंताओं, भयों और मानसिक- स्थिति को एक दूसरे से बिंदास साझा करना 
  • तर्कहीन तर्कों से बचना,  सौहार्द बनाये रखना और भविष्य के प्रति आशावान तथा कार्यशील रहना 
  • बच्चों जैसे नाज़ुक निर्णय को दोनों की सहमति से ही अंजाम देना 
  • हालांकि एक साथ समय बिताना और रुचियों को साझा करना महत्वपूर्ण है पर एक दूसरे को स्पेस और भरोसा देना  भी उतना ही आवश्यक है 

मैं और तुम या हम 

एक-दूसरे को पोसेस करना- संबंधों के लिये घातक है| आपसी असहमति के दौरान भी शिष्टता और समझौते की भावना बनाए रखना संबंधों के सामंजस्यपूर्ण बने रहने में मदद करता है | 

वह दंपतियाँ जो घर में जिम्मेदारियों को बाँटते  हैं – एक-दूसरे की मदद करने का प्रयास करते है, एक दूसरे के अधिक करीब होते हैं | इससे घर के माहौल में भय , घबराहट , चिंता – के बजाय शांति और समृद्धि और स्वास्थ्य के पद-चिन्ह पाए जाते हैं | 

प्रेम की असीम संभावनाएं 

एक दूसरे के प्रति स्पॉनटेनियस और  सहज प्रेम आपको -एक प्रेम पूर्ण दाम्पत्य रोमांस का अनुभव देगा | विश्वास रखें कि प्रेम की संभावनाएं असीम है| 

यू जस्ट हेव टू स्टे देयर!

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