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मोतियाबिंद के ऑपरेशन से जुड़े कुछ तथ्य

मोतियाबिंद से जुड़ी कुछेक बातें तो हम भलीभांति जानते ही है| जैसेकि इससे आँखों का लेंस धुँधला हो जाता है, देखने में दिक्कत आती है- और एक हद तक यह उम्र बढ़ने पर होना निश्चित ही है| ऑपरेशन इसका एकमात्र इलाज है | 

इसके मुख्य लक्षणों में निम्न उल्लेखनीय है जोकि धीरे-धीरे विकसित होते हैं: 

  • धुँधला दिखना, रात्रि-दृष्टि में गिरावट
  • रोशनी के आसपास घेरे दिखना
  • रोशनी का अत्यधिक चमकदार महसूस होना (फ्लेशेस)
  • चीज़ें दोहरी  दिखना
  • रंगों से शार्पनेस गायब होना 
  • चश्में के नंबर में निरंतर बदलाव 

मोतियाबिंद का ऑपरेशन

जाँच-पड़ताल के पूर्व डॉक्टर आपको ऑपरेशन की सलाह दे सकते है चूँकि सर्जरी के द्वारा धुंधले लेंस को आर्टीफीशयल लेंस से बदला जा सकता है | यदि आप बेहतर क्वालिटी लाइफ चाहते है तो इसे शुरुआत में भी ऑपरेट करवा सकते हैं | 

कई बार रोगी और डॉक्टर – सर्जरी के लिये थोड़ा रूकने के विकल्प पर सहमत हो सकते है- चश्मे के नंबर में फेर बदल करके सर्जरी को कुछ समय तक टाला जा सकता है | डॉक्टर आपको नियमित रूप से जांच के दायरे में रख सकता है|  

  • 60 की उम्र में हर छ: महीनों के अन्तराल पर डाईलेशन के साथ आँखों  की जाँच करवानी चाहिये
  • हरी पत्तेदार सब्जियों, फलों, विटामिन इ और  सी युक्त आहार का सेवन करना चाहिये
  • अल्ट्रा-वायलेट सूर्य किरणों से बचाव हेतु सन-ग्लासेज, हैट-स्कार्फ़ आदि का उपयोग करें 
  • डायबिटीज़ को नियंत्रण में रखें
  • धूम्रपान और मदिरा को जीवनशैली बदलावों के द्वारा कंट्रोल करें 

ऑपरेशन के बाद, डॉक्टर के निर्देशों का सख्ती से पालन ज़रूरी है – कुछ समय के लिये आँखों में खुजली और दर्द, रोशनी से दिक्कत स्वाभाविक है- डॉक्टर द्वारा दिया काला चश्मा लगाकर रखें जो पोस्ट-ऑपरेटेड आँखों  की सुरक्षा करेगा| आँखों को मले नहीं, निर्देशानुसार दवा डालें| 

सर्जरी के बाद कुछ दिन ड्राइविंग न करें, शारीरिक व्यायाम, नहाना धोना, स्विमिंग,आई मेक-अप   – डॉक्टर को बताये बिना शुरू न करें – पूर्ण आराम लें | ऑपरेशन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आय-ड्रॉप्स डॉक्टर द्वारा बताये गये तरीके से डाले गये और आप अपने सर्जन के फॉलो-अप में रहें |

मोतियाबिंद आमतौर पर बड़ी उम्र की बीमारी माना तो जाता है। कई बार यह कम उम्र में भी संभव है – डायबिटीज़, बढ़ती उम्र, धूम्रपान ,मदिरा सेवन, ट्रॉमा  और स्टेरॉयड, अल्ट्रा-वायलेट रेडिएशन आदि इसके कई कारण हो सकते हैं| यह नवजात शिशु और किशोरों में भी कई बार जन्म-जात कारणों या फिर किसी मानसिक ट्रॉमा  की वजह से पाया जा सकता है | 

कई बार लोगों को लगता है कि ऑपरेशन के बाद उनकी पढ़ने की नजर तेज हो गई है-  वे बिना चश्मे के पढ़ पा रहे हैं, आदि | असल में यह लेंस में आई सूजन  हो सकती है , माइनस में नंबर बढ़ने से हो सकता है-  डॉक्टर को निष्कर्ष पर पहुँचने दें | 

मोतियाबिंद दोनों आँखों को ही नुकसान पहुँचाता है– लेकिन कई बार यह एक आँख में पहले ज्यादा होता है। यदि आँख में दर्द है, नजर  कमजोर हो रही है- डॉक्टर से संपर्क करें ताकि ग्लूकोमा या किसी अन्य संभावित बीमारी की भी जांच की जा सके| 

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