अपने बुजुर्गों को दूसरी पारी खुशी से जीने में मदद करें

साठवें, सत्‍तरवें और अस्‍सीवें दशकों की मधुरता…. उन्हें देखा? सुबह-सुबह, कछुए की तरह धीमी गति से सुबह की सैर करते हुए? पक्षियों को देखते, सूरज को घूरते, जितना संभव हो सके ऊबने की कोशिश करते […]

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