ओसीडी – आब्सेसिव कम्पलसिव डिसआर्डर
ओसीडी – आब्सेसिव कम्पलसिव डिसआर्डर
यदि आप हमेशा अपने दरवाज़ों में ताले लगे होने की बार-बार जांच करते हैं, बार-बार यह देखते हैं कि गैस सिलेंडर का रेगुलेटर बंद है या नहीं या पानी सप्लाई को बंद किया गया है या नहीं, और आप समझते हैं कि यह व्यवहार सामान्य नहीं है या यदि आप बार-बार अपने हाथों को धोते हैं।
तो इसे आब्सेसिव कम्पलसिव डिसआर्डर कहा जाता है।
मेरे बाध्यकारी विचार संभावित समस्या क्यों हो सकते हैं?
तर्क बहुत सरल है। आपके विचार व व्यवहार चाहे कितने भी अतार्किक क्यों न हों, आप उन्हें ठीक मानते हैं। मान लीजिये आप एयरपोर्ट जाने के लिए, कैब में बैठने वाले हैं, हालांकि आपके पास समय कम है, फिर भी आप यह देखने के लिए दो बाद वापिस जाते हैं कि घर का दरवाज़ा ठीक से लाॅक हुआ है या नहीं। यह असामान्य है लेकिन आपको ऐसा करने के बाद ही तसल्ली होती है।
इसी प्रकार, ओसीडी ;व्ब्क्द्ध किसी भी व्यक्ति के सामान्य जीवन को प्रभावित करता है। आधे समय तो आप कठिन दिनचर्या में बिताते हैं और बाकी समय उसके प्रति बार-बार आश्वस्त होने मंे बिता देते हैं और यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको अपना अस्तित्व समाप्त होता दिखता है।
किन लोगों को ओसीडी ;व्ब्क्द्ध होने की संभावना होती है?
तीन तरह के लोगों में ओसीडी ;व्ब्क्द्ध विकसित हो सकता हैः वहमी, पूर्णतावादी (परफेक्शनिस्ट), बीमार।
वहमी किसी भी सोच के प्रति सनकी होते हैं जैसे सफाई के प्रति और वे किसी भी रोग या समस्या से संभावना को समाप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। जैसे कि दीवालिया होने की संभावना को समाप्त करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं
इसे वहम या सनक कहा जाता है।
सम्पूर्णतावादियों (परफेक्शनिस्ट) के अपने स्वयं के मानक होते हैं – जैसे परफेक्ट धुन, स्कार्फ का उपयुक्त रंग, चाय में दूध की सही मात्रा। अभ्यास से व्यक्ति सम्पूर्ण हो सकता है लेकिन आप किसी के लिए पीड़ा बन जाते हैं तो आप ओसीडी ;व्ब्क्द्ध के शिकार हैं।
रोगी वे होते हैं जो ओसीडी ;व्ब्क्द्ध के शिकंजे में फंस जाते हैं और अपने कुछ रहस्यों को छिपाने का प्रयास करते हैं, बुरी यादगारों से बचने की कोशिश करते हैं। वास्तव में वे अवसाद, तनाव से लड़ रहे होते हैं और पीड़ादायक सोच से निराश होते हैं।
ओसीडी ;व्ब्क्द्ध में जुनून और बाध्यताएं मिलकर व्यक्ति को कोई काम बार-बार करने पर विवश कर देती हैं।
क्या ओसीडी ;व्ब्क्द्ध से पीड़ित लोग बार-बार कार्यों को दोहराते हैं?
बार-बार आने वाले विचार, आग्रह या मानसिक छवियाँ जुनून बन जाती हैं, जिससे रोगी के मन में बेचैनी होने लगती है। ओसीडी ;व्ब्क्द्ध के सामान्य पैटर्न ये हैंः
➔ गिनना
➔ बार-बार-जांच करना
➔ धुलाई/सफाई
➔ कड़ी दिनचर्या बनाये रखना
➔ क्रमबद्धता
➔ बार-बार आश्वस्त होने की जरूरत महसूस करना आदि
इसके सामान्य व्यवहारः
- बार-बार हाथ धोना
- गिनने का अलग पैटर्न
- बार-बार यह जांचना कि गैस स्टोव या लाइटें बंद हैं या नहीं, दरवाज़ों में ताले लगे हैं या नहीं
- कीटाणुओं के सम्पर्क में आने के डर से हाथ मिलाने या दरवाज़ें के कुंडों को छूने से बचना
- खास तरीके से भोजन खाना
- वस्तुओं की जमाखोरी करना
- किसी विशेष, क्रमबद्ध तरीके या खास दिनों पर खरीदारी करना
क्या मुझे डाॅक्टर की मदद की जरूरत है? क्या में ओसीडी ;व्ब्क्द्ध से उबर पाऊंगा/पाऊंगी?
जब जुनून और बाध्यताएँ (विवशताएँ) आपके रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करने लगें तो डाॅक्टर से सम्पर्क करें।
ओसीडी ;व्ब्क्द्ध के प्रभावी उपचार के रूप में एक्सपोज़र एंड रिस्पांस प्रीवेंशन ;म्त्च्द्ध को फायदेमंद पाया गया है, जिसमें व्यक्ति को उसी स्थिति में रखा जाता है जिससे वह सबसे ज्यादा डरता है ताकि उस भ्पाय से छुटकारा मिल सके। ओसीडी ;व्ब्क्द्ध की समस्या हल्की या गहन हो सकती है और यह पूरी तरह या आंशिक रूप से ठीक हो सकती है।
आप अपने डाॅक्टर को जितना अधिक बताएंगे और उसके निर्देशों का पालन करेंगे, उतना ही गुणवत्तापूर्ण जीवन बिता सकने के लिए तैयार हो पाएंगे।






