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पैनिक अटैक पर काबू पाएं

पैनिक अटैक

पैनिक अटैक के दौरान सांस की तकलीफ एक सामान्य लक्षण है और इसमें एंग्जाइटी, भय और परेशानी महसूस होती है। पैनिक अटैक से पीड़ित व्यक्ति के फेफड़ों में पर्याप्त हवा न पहुंचने से उसे घुटन महसूस होने लगती है और ऐसा महसूस होता है मानो सांस रुक रही हो।

पैनिक अटैक का दौरा पड़ने पर दिल की धड़कन तेज होना, षरीर थरथराना, कांपना, सुन्नता और झुनझुनी जैसी कुछ अन्य असुविधाजनक संवेदनाएं भी अक्सर महसूस होती है।

आपको ऐसा महसूस होगा कि आप सांस नहीं ले पा रहे हैं

पैनिक अटैक संभावित हानिकारक स्थितियों या उत्तेजनाओं से दूर भागने या उसका मुकाबला करने जैसे किसी भी मामले में हो सकता है। हम किसी कार्य को समय सीमा के भीतर खत्म करने के दवाब, किसी मित्र के साथ या परिवार के भीतर बहस और यहां तक कि यातायात में फंसने जैसी सामान्य स्थितियों के कारण पैदा हुए तनाव के प्रतिक्रिया स्वरूप भी इसे उभरते हुए देख सकते हैं।

ये अटैक एंग्जाइटी डिसआर्डर के प्रति संवेदनषील लोगों में अधिक होते हैं और इसमें पैनिक और एंग्जाइटी के षारीरिक लक्षण प्रकट होते हैं। पैनिक अटैक के दौरान षुरू हुए किसी समस्या से दूर भागने या उसका मुकाबला करने के प्रतिक्रिया स्वरूप व्यक्ति के श्वास पैटर्न में बदलाव आ जाता है – उसकी धड़कन तेज हो जाती है, सांस उखड़ने लगती है और सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। इन परिवर्तनों के साथ रक्त के साथ घूमने वालेे कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम हो जाती है और सीने में दर्द, बेहोशी, सिर घूमने और चक्कर आने सहित अन्य शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं।

मैं पैनिक अटैक से कैसे बचूँ?

बेहतर तरीके से सांस लेना इससे बचने का मुख्य उपाय है। इसके अलावा कई और भी उपाय हैं जिन पर अमल करके पैनिक अटैक पर काबू पाया जा सकता है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज: सांस लेने में तकलीफ होने पर ब्रीदिंग पैटर्न बदल जाता है। आपको अपनी श्वास वापस ट्रैक पर लाने के लिए रणनीति में महारत हासिल करनी चाहिए।

  • पैनिक अटैक या अन्य समस्याओं के दौरान अपने सांस लेने के पैटर्न पर ध्यान दें।
  • अपनी सांसों के अनियमित होने और उखड़ने पर ध्यान दें।
  • ऐसी स्थिति में, गहरी साँस लेने का व्यायाम करने से आपको आपको शांति मिलेगी।
  • अपनी सांस को धीमा करना शुरू करें। नाक के माध्यम से गहराई से श्वास लें और फेफड़ों में सांस को भरें। जब आप फेफड़ों में और अधिक हवा नहीं ले जा सकते हैं, तो सभी हवा को धीरे-धीरे मुंह से बाहर निकाल दें।
  • इसे कुछ मिनट तक दोहराएं। आप अपेक्षाकृत शांत महसूस करेंगे।

रिलैक्सेशन तकनीकें शांति और व्यवहार में परिवर्तन कर तनाव और परेषानी की भावनाओं को कम करने में मदद करेंगी। साँस लेने के पैटर्न पर आधारित कुछ रिलैक्सेषन तकनीकें जिन्हें आप सीख सकते हैं, उनमें मेडिटेषन, विजुअलाइजेषन और प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेषन (पीएमआर) शामिल हैं। आपको इन तकनीकों का नियमित रूप से अभ्यास करने के लिए एक समय निर्धारित करना चाहिए, लेकिन उस समय कोई इमरजेंसी नहीं हो। दृढ़ता, धैर्य और नियमित अभ्यास के साथ – रिलैक्सेषन तकनीक से आप पैनिक अटैक से काफी फायदा होते हुए देखेंगे।

इलाज कराने में संकोच न करें

यदि आपको पैनिक अटैक के दौरान सांस लेने में तकलीफ और अन्य लक्षण अक्सर होते हैं तो आपके लिए इलाज कराना महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार पैनिक अटैक जेनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसआर्डर (जीएडी), पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) या सोषल एंग्जाइटी डिसआर्डर (एसएडी) जैसे अन्य एंग्जाइटी डिसआर्डर के साथ भी महसूस हो सकते हैं। केवल एक डॉक्टर या एक अच्छी तरह से योग्य मानसिक चिकित्सक ही सही निदान करने और इलाज की योजना बनाने में सक्षम होगा, जो दवाओं, स्व-सहायता तकनीकों, मनोचिकित्सा आदि की सलाह दे सकता है।

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