म्यूजिक थेरेपी ने बदल दी मेरी ज़िंदगी
संगीत का आनंद कहीं भी और किसी भी समय पर उठाया जा सकता है। इसके लिये आपको एक कुशल सिंगर या डाँसर होना अनिवार्य नहीं है| यह बात आज मैं नितांत दावे के साथ कह सकती हूँ – चूँकि आज मैं अपने पचास के दशक में हूँ और उम्र के उस पड़ाव पर भी हूँ जहाँ मैं मुख्यत: अपनी ज़िम्मेवारियों से मुक्त हूँ और इसी के साथ ही मेनोपॉज से भी जूझ रही हूँ| उदासी, एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम जैसी कई चीज़ें भी है| यह कहना आसान है कि एडजस्ट करो, शौक पालो- कुछ नया सीखो | पर पॉजिटिव रहना एक चैलेंज है |
मैं जानती हूँ कि मेरी जैसी कई महिलाएं जोकि घर गृहस्थी संभाले रहती है – एक नितांत खालीपन का अनुभव कर सकती हैं और यदि वे इस स्थिति को हाथ से निकल जाने दे तो डिप्रेशन का शिकार हो सकती है | शायद मेरा लिखना – उन सबको एक नयी प्रेरणा दे सके, मैं उन सबके साथ म्यूजिक थेरेपी के अपने अनुभव को बाँटना चाहती हूँ|
म्यूजिक थेरेपी
हर व्यक्ति की अपनी पसंद के अनुरूप संगीत हम सभी को ही भाता है | वो चाहें क्लासिकल हो या सेवेंटीज़ का रॉक , सूफी कलाम या डिस्को की अदभुत थाप – म्यूजिक हम सभी को हृदय के किसी अदृश्य तल पर प्रभावित करने की क्षमता रखता है| इसकी इस खूबी के कारण इसे कई शारीरिक और मानसिक बीमारियों के इलाज के इस्तेमाल में लाया जाता है | और इसे म्यूजिक थेरेपी का नाम दिया गया है |
म्यूजिक थेरेपी के लाभ
अब इसके कुछ लाभ देखें :
- मनोरंजन के साथ संगीत हमारे तनाव को भी काफी हद तक कम करता है
- अवसाद और बेचैनी को दूर करता है
- एकाग्रता को बढाता है
- शारीरिक दर्द को भी कम करने जैसे उपायों में शोध परिणाम इसे अव्वल बता रहे हैं
तनाव से राहत और आराम – कैसे?
शायद – यह खून के संचार, हैप्पी होर्मोनेस को प्रोत्साहित करता होगा| आज के ज़माने में कमर तोड़ स्ट्रेस, जॉब से जुडी परेशानियां – वक्त की कमी| रिश्तों के तनाव – यह सूची जितना चाहें बढ़ा सकते हैं | डॉक्टर जितना भी चाहें – चौबीस घंटे वे हमारी रगों में खून बन कर नहीं दौड़ सकते| पर संगीत ऐसी इंटिमेट फीलिंग है कि यह हेडफ़ोन लगाते ही ज़िंदगी का अन्तरंग हिस्सा है, अत: रिलैक्स होने को इससे बेहतर कोई तरीका नहीं | चाहें सुबह का योग सेशन या शाम की भजन संध्या – म्यूजिक में कई चुनाव यानि चोइसेस उपलब्ध हैं |
स्वस्थ्य और संगीत – कैसे ?
तनाव को खत्म करते ही कई बीमारियाँ अपने आप ही जड़ से ख़तम हो जाती हैं – चाहें वो दिल से सम्बन्धित हो, मानसिक हो, ब्लड प्रेशर या फिर कैंसर की लास्ट स्टेज पर पेल्लियटिव केयर- म्यूजिक थेरेपी सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है | एक उमंग और जोश का संचार करती है |
मेरी सलाह है :
- अगर आप बहुत तनाव भरे माहौल में काम करते हैं – हाई बीट्स वाला म्यूजिक आपको तनाव से राहत देगा – ट्राई करो |
- नींद न आने पर सॉफ्ट धीमा म्यूजिक लगा कर, बत्तियां बुझा दे| अगरबत्ती जलायें – ढीले कपडे पहने और सो जाएँ|
- मधुर व कर्णप्रिय संगीत सुनने से मांसपेशियों को भी राहत मिलती है। कंप्यूटर पर काम करते वक़्त थोडा म्यूजिक बजाएं और धीमे सांस भीतर बाहर खींचे | शोर्ट ब्रेकस लें|
- सकारात्मकता बढ़ाने में भी संगीत को उपयोगी माना जाता है। तो जब भी मौक़ा मिले मुस्कुरा दें – गुनगुना दें और इसी के साथ ही म्यूजिक सिस्टम की आवाज़ थोड़ी कम रखें – ताकि कान के पर्दे सुरक्षित रहें और आप इस थेरेपी का आजीवन आनंद लेते रहें और मेरी तरह म्यूजिक थेरेपी के दीवाने रहें !






