हंसी ख़ुशी बिठाएं ताल मेल, निभायें अपनी ज़िम्मेदारियाँ
बढ़ती उम्र के साथ हमारे बुजुर्ग जबकि अक्सर अकेलेपन और सामाजिक अलगाव का शिकार होने लगते हैं वहीँ नौजवान पीढ़ी अपने जीवन , कैरियर आदि की समस्यायों में उलझी होती है | दोनों ही पक्षों का दृष्टिकोण अपने-अपने हिसाब से उन्हें सही दिखता है पर वहीँ यह दोनों में परस्पर तनाव का कारण भी बन सकता है |
आईये जानें कि दो पीढ़ियों के बीच सुलह समझौते का मध्य मार्ग क्या है |
बुढ़ापे में अकेलेपन और कुंठा के कई कारण हो सकते हैं
इस मनोवस्था के चलते बुजुर्गों के व्यवहार में कभी कभार हमें बच्चों जैसी जिद्द या बचपन की झलक दिखायी पड़ जाती है, उनके साथ ताल-मेल बिठाना, निर्वाह करना या उन्हें खुश रखना बहुत मुश्किल हो जाता है पर इसका यह मतलब नहीं कि हम उन्हें उनके हाल पर छोड़ दें और मानसिक रूप से बिखरने दें|
उनमें पनपे अकेलेपन के निम्न कारण हो सकते हैं:
- जीवन-साथी का साथ छूट जाना
- जीवन-साथी का अपने-आप में मस्त रहना
- सेवा-निवृत्ति के बाद की उलझन
- पीढ़ियों के बीच मतभेद , आदि
वह अपने बच्चों और आसपास के लोगों से उम्मीद करते है कि वे उनकी उपेक्षा न करें , उन्हें अपने जीवन में महत्व दें – उनसे जिम्मेवारियां और दुःख सुख बांटे | आधुनिक समय में यह समस्या और भी गहरा सकती है चूँकि अब हम सब फेसबुक, ट्विटर पर कई घंटे बने रह सकते हैं और यथार्थ से परे जीने लगते हैं |
नव पीढ़ी से गहन आशाएं हैं आधुनिक समय में
आधुनिक जीवन के दबावों के कारण बच्चों के लिये यह संभव नहीं है कि वह हमेशा ही बुज़ुर्गों की आशाओं पर खरे उतरें, लेकिन उन्हें चाहिये कि वे कम से कम रूखे व्यवहार से उन्हें यह न जताएं कि वे उनकी ज़िंदगी में कोई ख़ास महत्व नहीं रखते | एक ओर जहाँ बच्चों का अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान और उन के लिए अपने दायित्वों को समझना नितांत आवश्यक है , वहीँ परिवार के बुजुर्गों का भी कर्तव्य है कि वे नई पीढ़ी की सोच और समझ की भी सुनें तथा अपने अनुभवों और तजुर्बों के द्वारा उन्हें परिपक्व बनायें और वक़्त के साथ चलें |
मिल बाँट कर जीवन को सहिष्णुशील बनायें
बुजुर्गों को अपने समय का बीड़ा स्वयं उठाना ज़रूरी है तथा जीवन में कुछ शौक रखना ज़रूरी है उसी तरह बच्चों को भी अपने कुछ शौकों का उनसे आदान प्रदान करना एक संतुलन स्थापित कर देता है- जैसेकि उन्हें अपने साथ घूमने ले जाएँ, कभी-कभार उन्हें अपने साथ सिनेमा ले जाने पर भी कोई हर्ज़ नहीं| दोनों पीढ़ियाँ कुछ गेम्स भी इक्कठे खेल सकते है |
अत: दोनों पक्ष शुरुआत अपने घर से करें – एक ही छत के नीचे रह कर एक दूसरे की ख़ुशी के लिये एक कदम आगे बढ़ाना ज़रूरी है, भावनाओं को समझना रिश्तों की मिठास का कारण |






